आखिर कब मिलेगा गुड़िया को इन्साफ

Date: 21 Jul 2017
क्या हमारा पुलिस प्रशासन इतना कमज़ोर है कि कोटखाई जैसे छोटे से कसबे में एक बलात्कार तथा क़त्ल कि दुखद घटना में लिप्त गुनहगारों को न ढूंढ पाए? क्या विश्व शक्ति बनने का सपना देखने वाले भारत देश की कानून व्यवस्था इतनी लचर है कि हर बार किसी निर्भया को न्याय दिलाने के लिए लोगों को सड़कों पे उतरना पड़ेगा?

justiceforgudiya.jpg

प्राचीनतम सभ्यता के नाम का डंका बजाने वाले हम लोग कब सभ्य होंगे? कब समाज में बलात्कार जैसी घटनाएं होनी बंद होगी? कब दहेज़ के नाम पर स्त्रियों का उत्पीड़न बंद होगा? ये चाँद सवाल हैं जिनके उत्तर के लिए हर इंसान को अपने अंदर झांक कर देखना होगा.

5 साल पहले चकाचोंध भरी दिल्ली की सड़कों पर डॉक्टर बनने जा रही एक लड़की को चलती बस में बलात्कार करके मरने के लिए छोड़ दिया. जख्म इतने भयानक थे की निर्भया मौत से लड़ी तो ज़रूर लेकिन बच न सकी. निर्भया खुद तो चली गयी इस दुनिआ को छोड़ कर लेकिन अपने पीछे ढेरों सवाल छोड़ गयी. जिनमे सबसे बड़ा ये कि क्या इस समाज में बेटियां कभी सुरक्षित हो पाएंगी? क्या बिना डर, बिना झिझक के रात को सड़कों पर चल पाएंगी? क्या निर्भया को इन्साफ मिल पायेगा?

दिल्ली में पुरे देश का मीडिया बस्ता है. निर्भया केस को मीडिया ने बहुत तवज्जो ले साथ उठाया. लेकिन फिर भी इन्साफ के लिए हज़ारों लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ा. हर जगह जैसे निकले गए, आंदोलन हुए, पुलिस तथा प्रशासन पर दबान बनाया गया. इन सारे दबाव के बीच दिल्ली पुलिस जैसे तैसे गुनहगारों को पकड़ने में सफल रही.

लेकिन लाखों लंबित मुकदमों का बोझ झेल रही हमारी कानून व्यवस्था को ये केस भी भारी लगा. जहाँ सारे सबूत सामने थे, सभी कातिल गुनाह कबूल चुके थे. फिर भी सजा देने में 5 साल लग गए. एक नाबालिग को ये कह के कि छोड़ दिया गया कि उसे अच्छे बुरे कि समझ नहीं. जब उसने अपराध बालिगों वाला किया तो सजा के समय नाबालिग वाला व्यव्हार क्यों? अंग्रेजी में कहावत है 'Justice delayed is justice denied'. यहाँ तो सारे अबूत होते हुए भी 5 साल लग गए ये सोचने में कि सजा क्या दी जाये. पुलिस कानून और सजा इसी के लिए है कि लोगों को डर बना रहे और अपराध करने से पहले सोचे. लेकिन ऐसे सालों लगते रहे तो कौन डरेगा? सरकार ने एक कानून भी बनाया ' निर्भया एक्ट'. जिसमें शारीरिक शोषण से सम्बंधित कणों में संशोधन किया गया. लेकिन हासिल क्या हुआ? हर रोज़ सैंकड़ों ऐसी घटनाएं होती रही, निर्भयाएं चिल्लाती रहीं, इन्साफ के लिए दामन फैलाती रही. और हम सब भूल भल के अपनी रोजमर्रा में लग गए.

शिमला जिले के कोटखाई में स्कूल पढ़ने वाली एक 10 साल की लड़की के साथ बलात्कार करके जंगलों में फेंक दिया. जब बच्ची घर नहीं पहुंची तो तलाश शुरू हुई और 2 दिन के बाद लाश जंगल में मिली. निर्भया की तरह ये घटना भी इतनी नृशंस थी की पीड़ित लड़की के हाथ पांव तक तोड़ दिए गए थे.

निर्भया की गूँज को दिल्ली के गलियारों में पहुंचने में समय नहीं लगा. लेकिन गुड़िया की चीख पुकार शिमला के जंडलों से बहार नहीं निकल सकी. पुलिस 2-3 दिन तक सुराग ढूंढ़ने में लगी रही लेकिन कुछ होता न देख लोगों का गुस्सा फूटना लाज़मी था. धीरे धीरे लोग सड़कों पे जुटना आरम्भ हुए. स्थानीय मीडिया ने केस को बड़ी बहादुरी के साथ दिखाया लेकिन राष्ट्रीय मीडिया की आँखें अभी भी बंद थी. वहीँ लोगों ने सोशल मीडिया पे कुछ लड़कों की तस्वीरें फैलानी आरम्भ कर दी. बात सरकार तक पहुंची तो आनन् फानन में कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया. अफवाहें बढ़ती रही तभी पुलिस ने अगले दिन 4-5 गिरफतारियां करके केस को सुलझा घोषित कर दिया. लेकिन लोगों को पुलिस द्वारा बताई कहानी हज़म नहीं हुई. तो लोगों ने CBI जाँच की मांग उठाना शुरू कर दिया.

एक बार फ़ी एक बच्ची को इन्साफ दिलाने के लिए लोग सड़कों पे उत्तर गए. हिमाचल ही नहीं चंडीगढ़, पंजाब, दिल्ली में भी प्रदर्शन हुए. कुछ जगह पे प्रदर्शन उग्र हो गया. पुलिस की गाड़ियां तोड़ी गयी, पत्थर फेंकें गए, तोड़ फोड़ की गयी. साथ ही राजनीति भी होने लगी विपक्षी दाल सरकार पे सवाल उठाने लगे. वहीँ विपक्ष पर भीड़ को भड़काने और तोड़ फोड़ के लिए उकसाने के आरोप लगने लगे. चुनाव आने वाले हैं तो इन नेताओं को तो राजनीति करने का मौका मिला है.

लोगों के मुताबिक गुनेहगार बड़े घरों कि औलादें हैं जिनको बचने कि भरपूर कोशिशें जारी हैं. इसी बीच नेपाली मूल के एक आरोपी की पुलिस हिरासत में दूसरे आरोपी द्वारा हत्या कर दी जाती है. और पुलिस देखती रहती है. पुरे थाने को लाइन हाज़िर करके SP के तबादले के आदेश दे दिए जाते हैं. लेकिन आज के अख़बार में मृतक आरोपी की पत्नी के बयां से इस बात को बल मिलता है की क्या सच में असली गुनहगारों को बचने के लिए कहीं सबूत मिटने की कोशिश तो नहीं की जा रही?

सरकार ने CBI जाँच की सिफारिश की दबाव के चलते. इछ न्यायालय ने भी आदेश दिए CBI को जनकज कमेटी बनाने के. लेकिन लगता दिल्ली से पैदल निकले हैं CBI वाले समय लगेगा पहुंचने में.

लेकिन इन असल सवाल अभी कायम है. ये वही सवाल हैं जो निर्भया के समय हमारे सामने थे. कि कब मिलेगा गुड़िया को इन्साफ? कब तक किसी निर्भया, किसी गुड़िया को इन्साफ दिलाने के लिए लोगों को सड़कों पर उतरते रहना पड़ेगा? कब इस समाज में ऐसी जघन्य घटनाएं होना बंद हो जाएँगी?




Comment using Facebook Account

Check Out Other News

Recent Posts

Tourist Places in Himachal Pradesh

colleges in Himachal Pradesh

Download Himachali songs