बुलाती तुम्हे मनाली

Date: 25 Dec 2016

पूर्व प्रधानमंत्री माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का हिमाचल विशेषतः मनाली से बेहद लगाव रहा है. अटल जी मनाली को अपना दूसरा घर मानते हैं. मनाली के प्रीणी गांव में उनका घर भी है. अटल जी बहुत ही अच्छे कवि भी हैं. प्रस्तुत है मनाली के लिए लिखी उनकी बेहतरीन कविता 'बुलाती तुम्हे मनाली'.



आसमान में बिजली ज़्यादा,
घर में बिजली काम।
टेलीफ़ोन घूमते जाओ,
ज़्यादातर गुमसुम॥

बर्फ ढकीं पर्वतमालाएं,
नदियां, झरने, जंगल।
किन्नरियों का देश,
देवता डोले पल-पल॥

हरे-हरे बादाम वृक्ष पर,
लाडे खड़े चिलगोज़े।
गंधक मिला उबलता पानी,
खोई मणि को खोजे॥

दोनों बांह पसार,
बुलाती तुम्हे मनाली।
दावानल में मलयानिल सी,
महकी, मित्र, मनाली॥


श्री कन्हैया लाल नंदन द्वारा प्रकाशित जी द्वारा लिखी हुई अटल जी की कविताओं के संग्रह 'क्या खोया क्या पाया' से साभार।



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