कोटरोपी भूस्खलन-कैसे हुई घटना और कैसे एक चट्टान ने बचाया पूरा गांव

Date: 13 Aug 2017
मंडी जिले के कोटरोपी में कल रात हुए भारी भूस्खलन में भारी जान माल की क्षति का अनुमान है. भूस्खलन की चपेट में 2 HRTC बसों के आ जाने के कारन भारी संख्या में लोगों के मरने की आशंका है. वहीँ कुछ और गाड़ियां जिंनमे से एक किसी अख़बार कि थी, एक पंजाब पुलिस कि गाडी तथा पास में पार्क की हुई स्थानीय लोगों की गाड़िया भी मलबे में दब गयी.

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कोटरोपी मेंभूस्खलन का इतिहास:


कोटरोपी में ये भूस्खलन की पहली घटना नहीं है. इस स्थान 2o साल के अंतराल में हो रही है भूस्खलन कि घटना. इस से पहले एक बार 1977 और फिर 1997 में भी इसी पहाड़ी के दरकने से काफी नुकसान हुआ था. तो इतिहास में 20 साल के अंतराल में ये तीसरी घटना है. 7 अगस्त 1997 के भूस्खलन में भी राष्ट्रीय उचमार्ग पे बना पल भूस्खलन के कारण बह गया था. उसके बाद भी इस पहाड़ी में लगातार दरार पड़ गयी थी जो लगातार बढ़ती जा रही थी. जिसकी जानकारी प्रशासन को भी थी. और पहाड़ी पर स्थित घरों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया जा चुका था. ये लोग बरसात के दिनों में घरों को छोड़ कर किसी दूसरी जगह चले जाते थे. इस भूस्खलन में वो घर तो बह गए लेकिन जानी नुकसान नहीं हुआ.

स्थानीय लोगों ने बताया की पिछले कल से ही इस पहाड़ी से पत्थर मिटटी गिरना शुरू हो गया था. अतः लोगों को इस भूस्खलन की आशंका हो गयी थी. तथा इसके बारे में स्थानीय प्रशासन को भी सूचित किया जा चुका था. लेकिन ये भूस्खलन इतनी मात्रा में होगा इसका अनुमान किसी ने नहीं लगाया.
रात के लगभग 11 के आसपास बजे पहाड़ी का दरकना शुरू हो गया था. जिस कारण दोनों ओर कुछ गाड़ियां रुक गयी थी. ये भूस्खलन इतना भयंकर था कि लगभग 2 किलोमीटर तक कई फ़ीट तक फ़ैल गया मलबा
एक बस मनाली से कटड़ा की और जा रही थी जिसमें लगभग 8-10 सवारियां थी जिंनमे से 3 की मौके पर ही मौत हो गयी. वहीँ 1 बाइक सवार भी मलबे के नीचे दब गया. बताया जा रहा है कि जैसे ही ड्राइवर ने मलबा गिरता देखा उसने बस को पीछे ले जाने की कोशिश की लेकिन उसी समय बस मलबे की चपेट में आ गयी लेकिन कुछ यात्री बस से निकलने में सफल रहे जबकि 3 नींद में होने के कारण निकल नहीं पाए ओर बस में ही फंसे रह गए. जिन्हे बचाव दल ने मृत पाया. वहीँ एक कार भी मलबे की चपेट में आ गयी थी लेकिन चालक किसी तरह जान बचने में कामयाब रहा. एक बाइक पर सफर कर रहे 2 लोगों में से एक युवक भी मलबे में दब गया.
वहीँ दूसरी तरफ भी लोगों को खतरे की भनक लग गयी थी. जिस कारण गाड़ियां रुक गयी थी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोगों ने बस ड्राइवर को भी पहाड़ी दरकने के बारे में बताया लेकिन उसने बस नहीं रोकी ओर आगे बढ़ता रहा. कुछ दूरी पर जब उसे जब मलबा आता दिखा तो उसने बस को पीछ ले जाने के कोशिश की लेकिन दुर्भाग्य से वह सफल न हो सका. जैसे ही बस पुल को पर करने वाली थी उसी समय भारी मलबे की चपेट में आ गयी ओर पुल समेत ही मलबे के साथ बह गयी. इसके आलावा कुछ ओर गाड़ियां भी मलबे में बह गयी लेकिन उनमे लोगों ने जैसे तैसे अपनी जान बचा ली. इस बस में लगभग 40-50 के बीच सवारियां थी. जिनमे से सभी के मृत होने की आशंका है. पुरे दिन के बचाव अभियान के बाद भी मलबे से इस बस की केवल 8 लाशें ही निकाली जा सकी थी.
रात को अँधेरे के कारण बचाव कार्य तीव्र गति से नहीं चल सका. हालाँकि मनाली कटड़ा बस के जख्मी यात्रियों रात में ही अस्पताल पहुंचा दिया था. सुबह होने के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और होम गार्ड के लोगों के साथ बचाव कार्य शुरू किया. इस दौरान DC मंडी रात से ही घटनास्थल पे हर स्थिति का जायजा ले रहे थे. उसके बाद लगभग 9 बजे सेना के पहुंचने के बाद रहत कार्य में और तीव्रता आयी. स्थानीय लोगों ने भी बचाव कार्य में बहुत सहयोग किया. लाशों को निकलने के आलावा राहत कर्मियों के खाने का प्रबंध भी गांव के लोगों ने मिल के किया.
इस घटना के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर और अनिल शर्मा सहित घटनास्थल का दौरा किया. उन्होंने मृतकों को तात्कालिक राहत राशि प्रदान की और कहा कि सरकार घायल यात्रियों की चिकित्सा पर आने वाले खर्च का वहन करेगी। उन्होंने सम्पत्ति के नुकसान का शीघ्र अनुमान लगाने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावितों को उचित मुआवजा तथा अन्य सहायता प्रदान की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि अन्तिम व्यक्ति को खोज निकालने तक बचाव कार्य जारी रहेगा।

एक चट्टान ने बचा लिया पूरा गांव


इस भूस्खलन से दायीं तरफ एक घर को आंशिक नुकसान हुआ है और कुछ खोखे मलबे में दब गए. वहीँ दायीं तरफ का एक गांव बड़वाहन भूस्खलन कि चपेट में आते आते बच गया. इस गांव में लगभग 8-10 घर हैं जो कि मलबे के बहाव कि दिशा में था लेकिन इस गांव से ठीक ऊपर 2-3 बड़ी चटानों ने मलबे को गांव कि तरफ आने से रोक दिया और मलबे का बहाव दूसरी दिशा में बदल दिया. अगर ये चट्टानें न होती तो इस गांव में किसी का बच पाना मुश्किल होता.
अभी तक पहाड़ी से मलबा गिरना जारी था. जिसके और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है.




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