सच फैलाओ झूठ और अफवाहें नहीं

Date: 12 Jul 2017
जब से ये facebook, whatsapp आये हैं हर कोई जर्नलिस्ट बन गया है, पुलिस भी हम ही हैं, जज कानून भी हम ही हैं.. हमें सबसे पहले खबर पहुंचनी है चाहे वो झूठी ही क्यों न हो, हमें सबसे पहले फैसला सुनना है चाहे उसका असर कुछ भी हो. इसी चक्कर में हम झूठी और सनीखेज ख़बरों के गिरोह का हिस्सा बन जाते हैं और झूठी और अपुष्ट फैलाते रहते हैं. लेकिन क्या ऐसा करने से पहले आप सोचते हैं कि यदि आपके द्वारा फैलाई जा रही खबर सच नहीं होगी तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं?

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अभी कोटखाई वाले केस में पुलिस द्वारा कुछ लोगों को हिरासत में लेने कि पुष्टि हुई है वहीँ सोशल मीडिया गैंग ने 5-6 लोगों कि तस्वीरें वायरल करके उन्हें सजा तक सुना दी है. यहाँ तक कि हमारे CM साहब ने भी हिरासत में लिए लोगों कि फोटो facebook में दाल दी. वहीँ कुछ जगहों पे डाली गयी फोटो पे कमैंट्स आ रहे हैं कि वो बंदा इसमें शामिल नहीं हैं. लेकिन हमने तो उसे फांसी तक कि सजा दे डाली है.

अब अगर वो निर्दोष है लेकिन उसकी फोटो आपने उस पोस्ट में देखी है और वो आपको कहीं मिल जाये तो सबसे पहले आपके दिमाग में क्या आएगा? और आपके एक शेयर से उस बन्दे कि पूरी ज़िन्दगी बदल सकती है.. और इस अपमान के कारण आत्महत्या जैसा कदम उठाना कोई बड़ी बात नहीं है. जैसा कि हल ही में काँगड़ा में एक युवक ने छेड़छाड़ का झूठा आरोप लगने पर आत्महत्या क्र ली थी. ज़रूरी नहीं है कि जो संदिग्ध हो वही मुजरिम हो. इसलिए साबरा रखें और कानून को अपना काम करने दें.

इस तरह कि घटनाओं में पीड़ित कि जानकारी को भी गोपनीय रखा जाता है. लेकिन यहाँ भी सबसे पहले खबर के चक्कर में उस पीड़ित लड़की कि तस्वीरें पुरे सोशल मीडिया में फैला दी.

इसलिए facebook, whatsapp के मेरे वीर साथियों खबरे फैलाओ लेकिन सच फैलाओ झूठ नहीं और फ़ैलाने से पहले खबर कि पुष्टि ज़रूर कर लो अन्यथा न फैलाओ भाई आपके एक शेयर करने कि वजह किसी को फांसी नई देने वाला क़ानून उसे सबूत चाहिए लेकिन आपका वो एक शेयर किसी कि ज़िन्दगी खराब करने के लिए काफी है.
उम्मीद है कि इस से आप कुछ सबक लेंगे.




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